मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं,
घर साफ होता तो कैसा होता.
मैं किचन साफ करता तुम बाथरूम धोते ,
तुम हॉल साफ करते मैं बालकनी देखता .
लोग इस बात पर हैरान होते,
उस बात पर कितने हँसते.
मैं और मेरा रूममेट अक्सर ये बातें करते हैं.
यह हरा-भरा सिंक है या बर्तनों की जंग छिड़ी हुई है, ये कलरफुल किचन है
या मसालों से होली खेली हुई है .
है फ़र्श की नई डिज़ाइन या दूध , बियर से धुली हुई हैं.
ये सेलफोन है या ढक्कन,
स्लीपिंग बैग है या किसी का आँचल .
ये एयर-फ्रेशनर का नया फ्लेवर है या ट्रैश-बैग से आती बदबू.
ये पत्तियों की है सरसराहट या हीटर फिर से खराब हुआ है.
ये सोचता है रूममेट कब से गुमसुम ,
के जबकि उसको भी ये खबर है
कि मच्छर नहीं है, कहीं नहीं है .
मगर उसका दिल है कि कह रहा है
मच्छर यहीं है , यहीं कहीं है.
तोंद की ये हालत मेरी भी है उसकी भी,
दिल में एक तस्वीर इधर भी है , उधर भी.
करने को बहुत कुछ है, मगर कब करें हम,
इसके लिए टाइम इधर भी नहीं है , उधर भी नहीं.
दिल कहता है कोई वैक्यूम क्लीनर ला दे,
ये कारपेट जो जीने को जूझ रहा है, फिकवा दे.
हम साफ रह सकते हैं, लोगों को बता दे